रगों में दौड़ते हैं आपके अल्फाज़

Tuesday, August 18, 2015

गुलज़ार साब !! क्या लिखूं , आपके लिए लफ्ज़ भी कम पड़ जाएँ....आप मेरे दिल के करीब हैं... रगों में दौड़ते हैं आपके अल्फाज़. ज़िन्दगी जीने का सलीका देते हैं आप. आपकी लिखावट रूह को ऐसे तस्कीन पहुंचाती है...जैसे किसी ने बर्फ का टुकड़ा रख दिया हो. क्या बधाईयाँ , क्या शुभकामनाएं.. दिल की दुआएं नज्र कर रहा हूँ.... क़ुबूल फरमाएं. आप हमेशा यूँ ही हमारे साथ रहें..... ख़ुदा आपको लम्बी उम्र बख्शे

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